झूठा ब्रेकआउट हादसा नहीं, आम अंजाम है
रेज़िस्टेंस टूटा. आप घुसे. वापस खींच लिया. यह दुर्लभ नहीं है — ब्रेकआउट का एक बड़ा हिस्सा ऐसे ही खत्म होता है.
होता क्यों है
टूटने के पल जो खरीदते हैं, ठीक उसी पल कुछ लोग इसी का इंतज़ार करके बेचते हैं. बेचने वाले भारी पड़ें तो भाव लौट आता है.
"टूटा" का मतलब "चढ़ेगा" नहीं. मतलब है: यहाँ से जाँच शुरू होती है.
पहचानने के सुराग़
पक्का तरीका कोई नहीं. पर सामग्री है.
- वॉल्यूम — भागीदारी बिना हुआ ब्रेकआउट ज़्यादा लौटता है
- क्लोज़ — पट्टी के ऊपर सिर्फ़ बाती निकालना और ऊपर बंद होना, दो अलग बातें हैं
- वापसी — टूटने के बाद भाव पट्टी तक लौटा और वहाँ थमा क्या
जब तय हो जाए
झूठा साबित होते ही वह अंदाज़ा खत्म है. "शायद फिर टूटे" अगली बात है, इस सौदे को बचाने की दलील नहीं.
यहीं ज़्यादातर लोग फिसलते हैं
टूटते ही पूरी पोज़िशन डाल देना. ब्रेकआउट जाँच की शुरुआत है, तो जाँच देखी जा सकती है. रुककर जो छूटता है और न रुककर जो वापस चला जाता है — दोनों गिनिए. गिनने वाले अक्सर रुकते हैं.
यह सीखने के लिए है, निवेश सलाह नहीं.
#पैटर्न#झूठा ब्रेकआउट
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